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Monday, 6 January 2020

छत्तीसगढ़ी गजल-मिलन मिलरिया

छत्तीसगढ़ी गजल-मिलन मिलरिया

बहरे हज़ज मुसम्मन अख़रब मक़्फूफ़ मक़्फूफ़ मुख़न्नक सालिम
मफ़ऊल मुफ़ाईलुन मफ़ऊल मुफ़ाईलुन

221 1222 221 1222

चक्कर मया के झिनपर, बाबू अझी पढ़ तो ले
दसवीं कै दफ़ा पढ़बे, एको कक्षा चढ़ तो ले।
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जिनगी म बहुत मिलही, खेले कुदे के मौका
बेरा दिनो दिन भागत, थोकिन बने गढ़ तो ले।
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तै संग पढ़ैया धर, झन धरबे घुमैया ला
बस चेत जगाके तै, मति तोर गा मढ़ तो ले।
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घर मा हे ग़रीबी जी, ककरो तो भरोसा नइ
पढ़ना हे सहारा बस, रद्दा इही बढ़ तो ले।
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देखव ग मिलन भाई, गुनले रे बने तैहा
कह भीम चलेगे गा, पढ़ पढ़ना रे पढ़ तो ले।
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🇮🇳
मिलन मिलरिहा

गजल

 गजल 2122 2122 2122 पूस के आसाढ़ सँग गठजोड़ होगे। दुःख के अउ उपरहा दू गोड़ होगे। वोट देके कोन ला जनता जितावैं। झूठ बोले के इहाँ बस होड़ होगे। खा...