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Thursday, 6 August 2020

ग़ज़ल--आशा देशमुख

 ग़ज़ल--आशा देशमुख


बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम

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212   212    212   212


रात बीते अगोरत पहर आखरी

मन मया मा हिलोरे लहर आखिरी।


आज पानी हवय प्रान बाँचे हवय

जीव खोजत फिरत हे नहर आखरी।


का कछेरी अदालत में जावत हवच

एक हावय मया के डहर आखरी


 जेन दिन वायरस के जी मिलही दवा

हे उही दिन करोना कहर आखरी।


मान पानी बिना कुछ नही हे सगा

झन गरू बन निकल अब ठहर आखरी।


भूख करजा गरीबी सताए जबड़

बाँचगे जिंदगानी जहर आखरी।


घूम के देश दुनिया तभो नइ थके

अब थिराले इही हे शहर आखरी।


आशा देशमुख

एनटीपीसी जमनीपाली कोरबा

Saturday, 1 August 2020

ग़ज़ल--आशा देशमुख


ग़ज़ल--आशा देशमुख


बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम
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212  212  212  212

आज बिजली हा कड़कत हवय जान ले।
मोर हिरदे हा धड़कत हवय जान ले।

देख खिड़की के पल्ला बने बन्द कर
ये हवा मा हे खड़कत हवय जान ले।

तँय कहाँ हस अभी तक तो नइहे खबर
मोर आँखी हा फड़कत हवय जान ले।

नानकुन होय खीला तभो हे जबड़
काँच के बीच तड़कत हवय जान ले।

देश के हाल बेहाल होवत हवय।
चीज ला स्वार्थ हड़कत हवय जान ले।

आजकल तो बफर के चलागन हवय
लोग मरनी मा  झडक़त हवय जान ले।

भूख मरगे सुहावय नही स्वाद हा।
रोग राई हा भड़कत हवय जान ले।

आशा देशमुख
एनटीपीसी जमनीपाली कोरबा

ग़ज़ल--आशा देशमुख

ग़ज़ल--आशा देशमुख

बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम
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212  212  212 212

सौ भले हे बड़े पाँच भारी पड़े
ताम पीतल म हे काँच भारी पड़े।

झूठ बइठे तराजू म क्विंटल किलो
एक तिल के सहीं साँच भारी पड़े।

डालडा हा जमे सोझ निकले नही।
नानकुन अंगरा आँच भारी पड़े।

लाख रुपिया के जानव सुबे के हवा
बैद डॉक्टर दवा जाँच भारी पड़े।

रेल लोहा हवय लाद लोहा चलय
जाय पटरी उखड़ खाँच भारी पड़े



आशा देशमुख
एनटीपीसी जमनीपाली कोरबा

ग़ज़ल--आशा देशमुख

ग़ज़ल--आशा देशमुख

बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम
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212  212  212 212

चोर चोरी करत खाँस भारी पड़े।
घाव तलवार ले फाँस भारी पड़े।

ये सही आय मुस्कान सुघ्घर लगय
पर विपत में खुशी हाँस भारी पड़े।

सोन चाँदी महल धन हवय तन सुघर
ये सबो चीज मा साँस भारी पड़े।

दिन बिताये रे सागौन के खेत मा
आख़री मा सखा बाँस भारी पड़े।

आय पहुना बनायेंव सोंहारी बरा
आज दारू नशा माँस भारी पड़े।


आशा देशमुख
एनटीपीसी जमनीपाली कोरबा

Monday, 27 July 2020

ग़ज़ल--आशा देशमुख

ग़ज़ल--आशा देशमुख

बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम
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212  212  212  212

राज कतको छुपाये  हवय डायरी
बात मन के लिखाये हवय डायरी।

भ्रष्ट सत्ता कहाँ कारनामा करे
पृष्ठ भीतर दबाये हवय डायरी।

गीत माला गुहे शब्द मोती बने
फूल पत्ता सजाये हवय डायरी।

प्रेम किस्सा कहानी अमर हे सदा
ठौर सब बर बनाये हवय डायरी।

पूछ ले कोन सन मा करे काम हे
वार तिथि दिन बताये हवय डायरी।

आशा देशमुख
एनटीपीसी जमनीपाली कोरबा

ग़ज़ल--आशा देशमुख

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बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम
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212  212  212  212

भाग जा रे करोना कहूँ मेर तँय
आय काबर लहुट के इहाँ फेर तँय।

बस पूछी ला हलावत रथस रे कुकुर
आज कइसे गली मा बने शेर तँय।

मोर भाई सिपाही ग झन काँपबे
मार बैरी लगा लाश के ढेर तँय।

ये लुकाये हवय तेल बीजा तरी 
जोश जाँगर लगा के बने पेर तँय।

बाट देखत मयारू पहर बीतगे
आज काबर लगाए अबड़ बेर तँय।

भूख कइसे मिटाही किलो पाव मा
खेत कोठी लबालब भरे हेर तँय।

हे विधाता जगत मा बढ़ादे मया 
रोज आशा लगा जोर के टेर तँय।


आशा देशमुख
एनटीपीसी जमनीपाली कोरबा

Saturday, 25 July 2020

ग़ज़ल--आशा देशमुख

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बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम
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212  212  212  212

कोन हावय जगत मा बिना दाग के।
धोय निर्मल करम हा बिना झाग के।

गीत संगीत खोजे नवा रोज धुन
का नकल कर सकँय कोयली राग के।

गोठ बोली घलो स्वाद देथे अबड़
बाँध लाड़ू परोसे बिना पाग के।

लोभ इरखा गरब छल कभू झन करव
लोग भोगत हे सुख दुख अपन भाग के।

रोज माली करय प्रभु सुनव प्रार्थना
सब कली फूल महकत रहय बाग के।

एक जइसे रहय नइ ये जिनगी कभू
भोग छप्पन मिले या बिना साग के।

देख तो घर गली खोर माते गियाँ
छाय हावय नशा रँग खुशी फाग के।

आशा देशमुख
एनटीपीसी जमनीपाली कोरबा

ग़ज़ल--आशा देशमुख

ग़ज़ल--आशा देशमुख

बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम
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212  212  212  212

राज कतको छुपाये  हवय डायरी
बात मन के लिखाये हवय डायरी।

भ्रष्ट सत्ता कहाँ कारनामा करे
पृष्ठ भीतर दबाये हवय डायरी।

गीत माला गुहे शब्द मोती बने
फूल पत्ता सजाये हवय डायरी।

प्रेम किस्सा कहानी अमर हे सदा
ठौर सब बर बनाये हवय डायरी।

पूछ ले कोन सन मा करे काम हे
वार तिथि दिन बताये हवय डायरी।

आशा देशमुख
एनटीपीसी जमनीपाली कोरबा

Friday, 24 July 2020

ग़ज़ल--आशा देशमुख

ग़ज़ल--आशा देशमुख

बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम
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212  212  212  212

आय हे साँप धरके सपेरा इहाँ
मौत जिनगी लगावत हे फेरा इहाँ।

हाड़ काँपे हवा संग पानी गिरे
जोर के आय धूका गरेरा इहाँ।

घर बनाये नवा तो डिजाइन (नमूना)रखे
पर दिखत नइहे गाला पठेरा इहाँ।

खेत बारी कहँय रोज मिहनत करव
लहलहावत  हवय गा लमेरा इहाँ।

घर मुहाटी गली रोज दीया बरे
राज मन मा करत हे अँधेरा इहाँ।

मान सुम्मत  मया के लगन छूटगे
अब दिखे लोभ स्वारथ के डेरा इहाँ।

अब कहाँ जाय आशा कती ठौर हे
बंद खिड़की महल काँच घेरा इहाँ।

आशा देशमुख
एनटीपीसी जमनीपाली कोरबा

गजल

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