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Monday, 1 June 2020

छत्तीसगढ़ी गजल

"मिठलबरा ला मार तुतारी"

सीख ले भइया दुनियादारी
मिठलबरा ला मार तुतारी।

आँखी मा धुर्रा फेंके अउ
बात-बात मा कहय लबारी।

अपनआप ला बड़े बतावै
धोखाबाज बड़े सँगवारी।

महा जुगाड़ू महा लफाड़ू
गावै सदा राग-दरबारी।

ओकर काम-बुता ये जानँव
एकर चुगली ओकर चारी।

मैं मैं मैं नरियावत रहिथे
ओकर आय इही चिन्हारी।

टेस बतावय राज-महल के
गिरवी ओकर लोटा थारी।

आगू करथे नँगत बड़ाई
पाछू देथे अब्बड़ गारी।

'अरुण' मानथे मिठलबरा ला
कोरोना ले बड़े बिमारी।

 - अरुण कुमार निगम
   आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)

गजल

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