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Sunday, 14 June 2020

छत्तीसगढ़ी गजल-आशा देशमुख

छत्तीसगढ़ी गजल-आशा देशमुख


*बहरे मुतदारिक मुसद्दस सालिम*
*फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन*
*212  212  212*

कोन बाँधे इहाँ काल ला।
कोन काटे बिछे जाल ला।

डर सतावत रहय रात दिन।
का बतावय मनुज हाल ला।

रोग फ़इलत हवय रोज के।
अब  बदल ले अपन चाल ला।

फूँक आगी अहम लोभ के।
काय करबे धरे माल ला।

बैठ के सब उँघावत हवँय
का बजावत हवच गाल ला।

दिन बदलही इही आस हे।
याद करहू यहू साल ला।

कोन जाने कहाँ शत्रु हे
राख आशा अपन ढाल ला।

आशा देशमुख

Wednesday, 13 May 2020

छत्तीसगढ़ी गजल-आशा देशमुख

छत्तीसगढ़ी गजल-आशा देशमुख

बहरे मुतकारिब मुसमन सालिम
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन
122 122 122 122

अबड़ दिन तो होगे करे लॉकडाउन।
लगे असकटासी सरे लॉकडाउन।

सबो चीज होगे हवय आज महँगा।
नमक ला घलो तो धरे लॉक डाउन।

कमैया बिना जी सुखागे किसानी।
मवेशी सबो ला चरे लॉकडाउन।

अपन गाँव लहुटत हे मजदूर मन हा
करोना मा कतको मरे लॉकडाउन।

गली खोर सुन्ना पुलिस हा दिखत हे
निकलबे त सोंटा परे लॉकडाउन।

बुता काम नइहे  न दाना न पानी
कते दिन भगाही जरे लॉकडाउन।

अपन गाँव परिवार आवत है सुरता
चले ट्रेन गाड़ी झरे लॉकडाउन।


आशा देशमुख

Wednesday, 29 April 2020

छत्तीसगढ़ी गजल-आशा देशमुख

छत्तीसगढ़ी गजल-आशा देशमुख

बहरे मुतकारिब मुसमन सालिम
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन
122 122 122 122

सुनत रात भर सब कहानी सिरागे
बोहावत नयन धार पानी सिरागे।

न परिवार भाये न सुख मा बुढापा
कमावत सकेलत जवानी सिरागे।

इहाँ रोज स्वारथ भरत हे तिजोरी
दया के संगेसंग दानी सिरागे।

जिहां देख बइठे उहाँ झूठ कुरसी
धरम ज्ञान सच के सियानी सिरागे।

भुलाये गली गाँव जाके शहर मा
मया मान पुरखा निशानी सिरागे।

करम आय मालिक करम आय नौकर
वो तइहा के सब राजरानी सिरागे।

बड़े जान घर हे न कोठा न बइला।
अरा रा तता ता किसानी सिरागे।

आशा देशमुख

गजल

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