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Tuesday, 4 June 2019

छत्तीसगढ़ी गजल - मोहन लाल वर्मा

छत्तीसगढ़ी गजल - मोहन लाल वर्मा                
              2122 2122 212

मँय मयारू तोर अँव पहिचान ले ।
मोर हिरदे  के मया ला जान ले ।।

रूप हे चंदा सहीं मन मोहनी,
भेंट माँगे का हवस भगवान ले ?

कर भरोसा मँय दगा देवँव नहीं,
चल कछेरी मा  लिखा ईमान ले ।

मोर पबरित  हे मया संसार मा,
जस निकलथे सोन-हीरा खान ले।

झाँक के तँय देख ले इतिहास मा,
नइ घुँचे हावँव कभू मैदान ले।

भागमानी तोर बेटा आँव मँय,
रोज लहराथँव तिरंगा शान ले।

मोर जिनगी के अँजोरी पाख तँय ,
आज ये "मोहन" कहय ऊँचान ले।

गजलकार - मोहन लाल वर्मा
अल्दा, जिला - रायपुर, छत्तीसगढ़

Monday, 3 June 2019

छत्तीसगढ़ी गजल - मिलन मलरिहा

छत्तीसगढ़ी गजल - मिलन मलरिहा

2122      2122     212

नून चाउर तेल हे, सरकार के
चाट गुप-चुप भेल हे, सरकार के

दाब चाहे झिन दबा तै बोट ला
सब बटन के खेल हे, सरकार के

जेल मा रहिके चुनाथे चोर जी
आमजन बर जेल हे, सरकार के

एक गलती नौकरी बर्खासती
नेता पेंसन पेल हे, सरकार के

देस के सैनिक खटारा बस चढ़य
मंत्री बर फ्री रेल हे, सरकार के

जाति मजहब भेद मा चाहे बटय
बोट खातिर मेल हे, सरकार के

मलरिहा जन सेवा देखावा हवय
 रूपिया-ए-ठेल हे सरकार के

गजलकार - मिलन मलरिहा
 छत्तीसगढ़

Saturday, 1 June 2019

छत्तीसगढ़ी गजल - ज्ञानु दास मानिकपुरी

छत्तीसगढ़ी गजल - ज्ञानु दास मानिकपुरी

खाए बर घर मा न चाउँर दार हे।
बस गरीबी के इहाँ भरमार हे।

भूल गे मनखे किसानी काम ला
देख बंजर आज खेतीखार हे।

आज रिश्ता अउ नता के गोठ हा
कोन ला भाथे लगे जस भार हे।

जिंदगानी के इही बस रीत हे
जीत हावय ता कभू जी हार हे।

फौजी भाई रोज सीमा मा मरै
हाथ मा चुप हाथ धर सरकार हे।

कोन लेथे सुध इहाँ बनिहार के
आज ले बनिहार के बनिहार हे।

पेर जाँगर खा कमाले तँय सुघर
'ज्ञानु' दुनियाँ मा इही बस सार हे।

गजलकार - ज्ञानुदास मानिकपुरी
ग्राम - चंदैनी, कबीरधाम, छत्तीसगढ़


Friday, 31 May 2019

छत्तीसगढ़ी गज़ल - सुखदेव सिंह अहिलेश्वर

छत्तीसगढ़ी गज़ल - सुखदेव सिंह अहिलेश्वर

2122 2122 212

का सुनावँव धाक नइहे बात के
आदमी मँय नानकन औकात के।

मँय अभागा दिन म अनचिन्हार हँव
का मदद के आस राखँव रात के।

कान खोले हाथ बाँधे हँव तभो
मोर बर निरदेस घूसा लात के।

झन डरा तँय तीन तल्ला तोर बर
मोर कद बस एक टँठिया भात के।

रोज थक के सो जथौं बिस्तर बिना
तँय समझथस मँय परे हँव मात के।

मँय सृजन सहयोग महिनत जानथौं
नइ समझ हे लूट धोखा घात के।

जर जवै कोनो त कोनो बर जवै
गोठियइया आँव मँय सँउहात के।

प्यार मा तँय मँय तहाँ शादी-बिहाव
का जरूरत नेग अउ बारात के।

आप पढ़थव खुश रथे सुखदेव हा
चाह नइहे वाह के बरसात के।

-सुखदेव सिंह अहिलेश्वर
  गोरखपुर कबीरधाम, छत्तीसगढ़

Thursday, 30 May 2019

छत्तीसगढ़ी गजल - अजय अमृतांशु

छत्तीसगढ़ी गजल - अजय अमृतांशु

देख ले झगरा ला थोरिक टार के ।
जीत जाबे मान बाजी  हार के ।

होत गंदा सब डहर जी गाँव हा।
देख कचरा घुरुवा मा तैं डार के।

जान लव दुनिया मा सब के हक हवे।
खाव झन दूसर के हक ला मार के

घर अपन उजियार करथस रोज गा।
देख दीया दीन के घर बार के।

मिल जथे कतको इँहा भटकाय बर।
कर अपन तैं बात सुन के चार के।

कोनो ककरो गोठ ला सुनथे कहाँ
हे फजीता गाँव घर परिवार के।

खाय हे किरिया"अजय"सिरतोन गा।
न्याय कहिहूँ नइ कहँव बेकार के ।

गजलकार - अजय अमृतांशु
भाटापारा, छत्तीसगढ़

Wednesday, 29 May 2019

छत्तीसगढ़ी गजल - जितेंद्र वर्मा खैरझिटिया

छत्तीसगढ़ी गजल - जितेंद्र वर्मा खैरझिटिया

2122   2122   212

नइ मिले शोहरत कभू बिन काम के।
कतको जग मा हे पड़े बिन नाम के।

काम कर कौड़ी कमा ना फोकटे,
धन सुबे आही सिराही शाम के।

धन असल ईमान अउ सम्मान हे,
सोन चाँदी हा हरे बस दाम के।

पद बढ़े अउ कद बढ़े सब सोंचथे,
फेर कोनो नइ चले सत थाम के।

चार दिन चलथे मया मातम इहाँ,
नाम रटते नित रबे श्री राम के।

झन जराबे गोठ मा दिल काखरो,
देंवता रिसहा अबड़ मन धाम के।

खैर नइहे खैरझिटिया के घलो,
ताव आगी कस बरे बड़ घाम के।

गजलकार - जितेंद्र वर्मा खैरझिटिया
बालको

Tuesday, 28 May 2019

छत्तीसगढ़ी गजल - मनीराम साहू

छत्तीसगढ़ी गजल - मनीराम साहू

2122 2122 212

गोठ हाबय सार भइया मान ले।
पेड़  होथे देंवता कस जान ले।

ये ह जीथे गा सुवारथ छोड़ के,
झन कटय तैं आज मन मा ठान ले।

पर जथन बीमार तव देथे दवा,
ठीक कर देथे अपन जर पान ले।

पेड़ बिन जिनगी अधूरा गा हवय,
नइ मिलय सुख जान कोनो आन ले।

नइ सकय वो बोल नइ वो हर चलै
आस करथे फेर गा इन्सान ले।

मीत हे गा जान झन तैं कर दगा,
मान ले तैं डर चिटिक भगवान ले।

हाथ जोरे हे कहत तोला 'मितान',
राख ले तैं कर जतन ईमान ले।

गजलकार - मनीराम साहू "मितान"

गजल

 गजल 2122 2122 2122 पूस के आसाढ़ सँग गठजोड़ होगे। दुःख के अउ उपरहा दू गोड़ होगे। वोट देके कोन ला जनता जितावैं। झूठ बोले के इहाँ बस होड़ होगे। खा...