छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल-सुखदेव सिंह आहिलेश्वर
बहरे रमल मुसमन महजूफ़
फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
2122 2122 2122 212
छू के तोला साॅंस पाथॅंव बात ला पतियाए कर
बाप के कमरा म बेटा थोरकन आ जाए कर
मुॅंह म आए लार ला रे रोजकन घुटकत रथॅंव
कम से कम मुर्रा के लाड़ू मोरो बर ले लाए कर
तैं पुछस जब मोर ले तव मैं मगन मन दॅंव जवाब
पूछ परथॅंव मैं कुछू ता बेटा झन हॅंउहाए कर
काज हा अच्छा बुरा होथे करइया हा नहीं
काज ला कोनो करय अच्छा हे ता सॅंहुराए कर
नेक कारज बर कभू कुछ आसरा करथे समाज
हाथ उठा के दे करस 'सुखदेव' झन कनुवाए कर
-सुखदेव सिंह''अहिलेश्वर''
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