गजल- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बहरे कामिल मुसम्मन सालिम
मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन
11212 11212 11212 11212
सुना गीत प्रेम रखे सखा, उगे चाँदनी नवा रात हे।
लगा ले गला दिखे जे दुखी, बने मीत के इही बात हे।।
खिले फूल सुंता मया धरे, रहे द्वेष बैर कभू नही।
गढ़े जा कहानी नवा नवा, दिनों दिन जवानी बुढ़ात हे।।
पड़े लोभ मोह के फेर मा, करे तैं खुशी ला खुँवार जी।
कहे जे ला मोर अपन सदा, उही धोखा जाल बिछात हे।।
लहू रंग एक हवय सुनौ, बड़े कोंन जाति बता भला।
कहे संत गुरु सदा बात ये, धरे स्वार्थ मनखे भुलात हे।।
कहे सत्यबोध सदा सही, धरे लोग बात कहाँ इँहा।
सजे धर्म ढोंग बजार जग, रखे शौंक झूठ बिसात हे।।
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ )
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Friday, 28 August 2020
गजल- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
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