गजल- दुर्गा शंकर ईजारदार
बहरे कामिल मुसम्मन सालिम
मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन
11212 11212 11212 11212
धरे हाथ मा धरे हाथ ला कभू बैठ झन तैं उदास रे,
कभू हार हे कभू जीत हे इही सोच भरले उजास रे।।
नसा नास करथे रे जान ले कभू जान के कभू मान के,
तहूँ गाँठ बाँध ले बात ला तैं तो छोड़ दे नसा बास रे।।
जुआ खेल मा नहीं बाँचे गा सरी जायदाद तो चल अचल,
कभू भूल के भी तो खेल झन जुआ बर तो तैं परी तास रे।।
कहाँ आज मनखे खुशी हवय कहाँ आज मनखे हँसत हवय,
हवै आज मनखे निराश गा दिखे जान नइये हे लास रे।।
कहाँ नीम के दिखे छाँव गा कहाँ सुमता के दिखे गाँव गा,
कहाँ राम लीला के ठाँव हे कहाँ कृष्ण लीला के रास रे।।
दुर्गा शंकर ईजारदार -सारंगढ़(छत्तीसगढ़)
Total Pageviews
Friday, 28 August 2020
गजल- दुर्गा शंकर ईजारदार
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
गजल
गजल 2122 2122 2122 पूस के आसाढ़ सँग गठजोड़ होगे। दुःख के अउ उपरहा दू गोड़ होगे। वोट देके कोन ला जनता जितावैं। झूठ बोले के इहाँ बस होड़ होगे। खा...
-
गजल 2122 2122 2122 पूस के आसाढ़ सँग गठजोड़ होगे। दुःख के अउ उपरहा दू गोड़ होगे। वोट देके कोन ला जनता जितावैं। झूठ बोले के इहाँ बस होड़ होगे। खा...
-
🌹 ग़ज़ल -आशा देशमुख 🌹 *बहरे रमल मुसम्मन मशकूल सालिम मज़ाइफ़ [दोगुन]* *फ़यलात फ़ाइलातुन फ़यलात फ़ाइलातुन* *1121 2122 1121 2122* वो लगाय नेकी...
-
ग़ज़ल - मनीराम साहू 'मितान' *बहरे रमल मुसम्मन मशकूल सालिम मज़ाइफ़ [दोगुन]* *फ़यलात फ़ाइलातुन फ़यलात फ़ाइलातुन* *1121 2122 1121 2122* ...
No comments:
Post a Comment