छत्तीसगढ़ी गजल-चोवा राम वर्मा'बादल'
*बहरे रजज़ मख़बून मरफ़ू’ मुख़ल्ला*
मुफ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ऊलुन मुफ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ऊलुन
1212 212 122 1212 212 122
अबड़ हे मँहगा जी दिल के सौदा लड़ाबे आँखी बिचार करके
हँसे ल परथे गिरा के आँसू सँजोये सपना खुवार करके
कभू बिछुड़ना कभू हे मिलना दरद के धुर्रा चले बड़ोरा
तभे सजन के झलक हा मिलथे अगिन के दहरा ल पार करके
अजब हवै प्रेम हा लोग कहिथें परान देके निभाथें कतकों
इहाँ कहानी सुने ल मिलथे अमर हे राँझा पियार करके
जमाना बैरी सदा रहे हे अभो मरत हे सलीम प्रेमी
खड़े हे नफरत कली चुनाही धरे हे खंजर ल धार करके
डगर मुहब्बत के तो कठिन हे सहज समझबे नही जी 'बादल'
कफन बने मूँड़ बाँध लेबे तहूँ अपन सुख उजार करके
चोवा राम वर्मा 'बादल'
हथबंद, छत्तीसगढ़
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Friday, 14 August 2020
छत्तीसगढ़ी गजल-चोवा राम वर्मा'बादल'
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गजल
गजल 2122 2122 2122 पूस के आसाढ़ सँग गठजोड़ होगे। दुःख के अउ उपरहा दू गोड़ होगे। वोट देके कोन ला जनता जितावैं। झूठ बोले के इहाँ बस होड़ होगे। खा...
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