ग़ज़ल ---आशा देशमुख
*बहरे रजज मखबून मरफू मुखल्ला*
मुफाइलुन फाइलुन फ़उलुन मुफाइलुन फ़ाइलुन फ़उलुन
1212 212 122 ,1212 212 122
फँसे न फांदा मा एक चिंगरी,भगाय मछरी बने जनिक हे।
बने नहा गोड़ ला लमाके ,तलाब पचरी बड़े जनिक हे।
बनव अमरबेल जी कभू झन,खुदे बनव पेड़ मेड़ माटी
नवा नवा बीज ला उगावव,हृदय के बखरी बड़े जनिक हे।
उही देवइया उही रखैया ,जगत रचे हे जगत रचैया
जिंखर तरी जीव नींद सूते,बनाय कथरी बड़े जनिक हे।
धरे हे काड़ी खनत हे खचुवा, कहत हवय अब पड़त हे सुख्खा
गहिर कुआँ मा भरे हे पानी, करम के रसरी बड़े जनिक हे।
खवात खावत दुसर भरोसा,चुनाव मा बोकरा कटावय
अपन कमाई चिंआँ बिसाये,कहय ये कुकरी बड़े जनिक हे।
आशा देशमुख
एनटीपीसी जमनीपाली कोरबा
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Wednesday, 12 August 2020
ग़ज़ल ---आशा देशमुख
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गजल
गजल 2122 2122 2122 पूस के आसाढ़ सँग गठजोड़ होगे। दुःख के अउ उपरहा दू गोड़ होगे। वोट देके कोन ला जनता जितावैं। झूठ बोले के इहाँ बस होड़ होगे। खा...
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गजल बहरे हज़ज मुसम्मन अख़रब मक़्फूफ़ मक़्फूफ़ मुख़न्नक सालिम मफ़ऊल मुफ़ाईलुन मफ़ऊल मुफ़ाईलुन 221 1222 221 1222 रेंगत हे गलत रस्ता इंस...
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🌹 ग़ज़ल -आशा देशमुख 🌹 *बहरे रमल मुसम्मन मशकूल सालिम मज़ाइफ़ [दोगुन]* *फ़यलात फ़ाइलातुन फ़यलात फ़ाइलातुन* *1121 2122 1121 2122* वो लगाय नेकी...
लाजवाब गजल दीदी बधाई
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