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Friday, 1 January 2021

गज़ल- ज्ञानुदास मानिकपुरी

 गज़ल- ज्ञानुदास मानिकपुरी 


बहरे हजज़ मुसद्दस सालिम

मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन 

1222 1222 1222


भरम के भूत काबर मन मा पाले जी

बिना समझे तहूँ चिखला उछाले जी


सहा बारात के चुपचाप नखरा ला

भुला झन जाबे हरस तँय बेटी वाले जी


खुदे आ फँस जही सब तोर फाँदा मा

हवस तँय आनी बानी चारा डाले जी 


किसानी काम जेनें जानथे करथे

का करना हे अपन भत्ता बढ़ाले जी


भरोसा नइये कब का 'ज्ञानु' हो जाथे

मया के गोठ सब सँग गोठियाले जी


ज्ञानु

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