छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल-सुखदेव
बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम
मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन
1222 1222 1222
ददा दाई जियत हन तोर डर झन कर
अभी जॉंगर चलत हावय फिकर झन कर
बस अतके हे निवेदन तोर ले बेटा
जुआ सट्टा नशा मा मन जहर झन कर
खदर छानी रहिस अब छाय हन खपरा
बनय ता छत बनय वापस खदर झन कर
गरीबी मा दुबर हन देख पहिली ले
फुटानी मार दुब्बर ला दुबर झन कर
गुजरगे हे दिवस हफ्ता ले पखवरिया
मजूरी दे अभी महिना बछर झन कर
न भटके हन न अटके अन बता देथन
रुपइयालाल तॅंय का करिया नजर झन कर
पहुॅंच जाबो हमू सुख के दुवारी तक
सगा सुखदेव तॅंय लकरे-लकर झन कर
-सुखदेव सिंह''अहिलेश्वर''
गोरखपुर कबीरधाम छत्तीसगढ़
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