*गजल--चोवा राम 'बादल'*
*बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम*
*मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन*
*1222 1222 1222*
अपन मत ठीक दूसर के गलत हावय
इही ढर्रा सदा दिन ले चलत हावय
सरक दे हे समे हा देखते देखत
वो बइठे हाथ ला कसके मलत हावय
बछर ये बीस बारा हाल कर दे हे
मरत नइये करोना हा पलत हावय
लुकागे का बिहनिया हा तरक्की के
बता सूरुज उवत हे या ढलत हावय
अँजोरी रात के बदला अमावस हे
इही घटना हा सब झन ला खलत हावय
भड़कही आग ता घर बार जल जाही
अजी तैं देख अवसर हा टलत हावय
समझ मत मुक्का बन रइही गरीबा हा
भरे गुस्सा मा मुँह वोकर उलत हावय
चोवा राम 'बादल'
हथबंद, छत्तीसगढ़
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