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Friday, 1 January 2021

गजल-जीतेंन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

 गजल-जीतेंन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"


*बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम*


*मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन*


*1222 1222 1222*


धरम के रथ ला हाँके के जरूरत हे।

थके अर्जुन ला बाँके के जरूरत हे।


दिखत हे देख लत गत तोर भँगभँग ले।

सुजी मा सत के टाँके  के जरूरत हे।


बिना जबरन बकत हस बनके बड़बोला।

मुँदे बर मुँह ला आँके के जरूरत हे।


बढ़ाये बर बने बिरवा सुमत सत के।

झिटी झाटा ला फाँके के जरूरत हे।


दुसर मन ला गलत ठहराय के पहिली।

अपन अंतस मा झाँके के जरूरत हे।


जीतेंन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

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