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Friday, 1 January 2021

ग़ज़ल --इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"*🌹



🌹 *ग़ज़ल --इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"*🌹


*बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम*

*मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन*

*1222 1222 1222*


जपौं कंठी सदा सतनाम गुरु घासी।

बना हिरदे अपन सतधाम गुरु घासी।


कृपा गुरु के गड़े ना पाँव मा काँटा 

करे हे दूर दुख के घाम गुरु घासी।


सबो के तन लहू के रंग लाली हे।

कहे हे एक मनखे चाम गुरु घासी।


चलौ नित राह मानवता अहिंसा के

दिये संदेश सत आवाम गुरु घासी।


तजौ पाखंड पूजा ढ़ोंग तन मन ले

कहे जिनगी असल तब दाम गुरु घासी।


पड़ौ झन फेर पथरा देवता धामी

कहे घट देव ला निज थाम गुरु घासी।


पढ़ा के एकता के पाठ जग जन ला

सुमत समता करे हे काम गुरु घासी।



गजलकार- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ )

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