🌹 *ग़ज़ल --इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"*🌹
*बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम*
*मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन*
*1222 1222 1222*
लिखौं मैं छंद कविता गीत बानी ला
गजल के सेर मा जिनगी कहानी ला।
गिनावत काम झूठा कागजी कोरा
करौ विश्वास झन नेता बखानी ला।
बढ़त हे घूस अउ बेरोजगारी हा
फिरत हे नव युवा खोवत जवानी ला।
ददा दाई रखे रहिबे अपन अँगना
सहारा बन पिला दू बूँद पानी ला।
कभू धोखा मिले नइ बात ये सच्चा
धरे कहना चलौ पात्रे सियानी ला।
गजलकार- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ )
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