गजल- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बहरे मुतक़ारिब मुसम्मन मक्सूर
फ़ऊलन फ़ऊलन फ़ऊलन फ़अल
122 122 122 12
दिनों दिन बढ़त अंधविश्वास हे।
बने लोग मँय वश इँहा दास हे।।
बढ़े ढ़ोंग पाखण्ड हा तो बहुत।
बसे झूठ मन मा बड़ा आस हे।।
सिपाही कलम के बने खाक तैं।
कहूँ चाटुकारी ह्रदय वास हे।।
बँधे पाँव जंजीर जब दासता।
वो मनखे तो जी के भी लाश हे।।
रखे लालसा चीज पद के कहूँ।
समझ ले मनुज के सबो नाश हे।।
रहव दूर चोरी नशा पान ला।
उजाड़े खुशी घर जुआ तास हे।।
गजानंद सच बात ला तो कहय।
दिलाथे धरे झूठ उपहास हे।।
गजलकार- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ )
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Wednesday, 2 September 2020
गजल- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
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गजल
गजल 2122 2122 2122 पूस के आसाढ़ सँग गठजोड़ होगे। दुःख के अउ उपरहा दू गोड़ होगे। वोट देके कोन ला जनता जितावैं। झूठ बोले के इहाँ बस होड़ होगे। खा...
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🌹 ग़ज़ल -आशा देशमुख 🌹 *बहरे रमल मुसम्मन मशकूल सालिम मज़ाइफ़ [दोगुन]* *फ़यलात फ़ाइलातुन फ़यलात फ़ाइलातुन* *1121 2122 1121 2122* वो लगाय नेकी...
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