गजल- दिलीप कुमार वर्मा
बहरे मुतक़ारिब मुसम्मन मक़सूर
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़अल
122 122 122 12
सड़क ला बनाये रहिस काल जी।
बने आज सब बर ये जंजाल जी।
बहाये रे पानी ते काबर बता।
सड़क के बना दे बुरा हाल जी।
हवेली खड़ा होत हावय उँखर।
दलाली करे खाय जे माल जी।
शिकायत करे कुछ न होवय सगा।
बड़े आदमी मन बने ढाल जी।
तुहीं ला फँसा तक ओ देही सखा।
चले लोग कानून के चाल जी।
रचनाकार-- दिलीप कुमार वर्मा
बलौदाबाजार छत्तीसगढ़
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Wednesday, 2 September 2020
गजल- दिलीप कुमार वर्मा
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गजल
गजल 2122 2122 2122 पूस के आसाढ़ सँग गठजोड़ होगे। दुःख के अउ उपरहा दू गोड़ होगे। वोट देके कोन ला जनता जितावैं। झूठ बोले के इहाँ बस होड़ होगे। खा...
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धन्यवाद वर्मा जी
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