🌹 *गजल- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"*🌹
*बहरे रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़*
*फ़ाइलातुन फ़यलातुन फ़यलातुन फ़ेलुन*
*2122 112 2 1122 22*
सत्य गुनगान करौं राह चलौं सत के जी।
साँस गुरुनाम चले चाह हवे अतके जी।।
लोभ जग झूठ रहौं दूर सदा दिन मैं तो
प्रेम धन जोर रखौ मोल मिले जतके जी।
ध्यान रख शान बढ़ा मान अपन पुरखा के
नाम हित देश धरम वीर शहादत के जी।
सार संदेश हवे नीड़ सबो प्राणी ला
बोल ईमान रखौ करम शराफत के जी।
जुल्म अन्याय गजानंद कभू नइ साहय
थाम सत ढाल बढ़े पाँव बगावत के जी।।
गजलकार- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ )
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