🌹 *ग़ज़ल -आशा देशमुख* 🌹
*बहरे रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़*
*फ़ाइलातुन फ़यलातुन फ़यलातुन फ़ेलुन*
*2122 1122 1122 22*
बैठे हे तोर दुवारी वो मया के सेती।
रीत रिश्ता ला निभाये हे सगा के सेती।
काम धंधा सबो चौपट करे किंजरत हस तँय
मोह परिवार तियागे हे नशा के सेती।
रात दिन के हवे मिहनत तभो पूरत नइहे
सब कमाई हा सिरागे हे दवा के सेती।
कार में बैठ के मारे वो फुटानी अब्बड़
मान धन जेन मिले दाई ददा के सेती।
सोन चाँदी ला इहाँ कोन रखे हे सुरता
जेन होये हे अमर आज कला के सेती।
आशा देशमुख
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