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Saturday, 2 January 2021

गज़ल- ज्ञानुदास मानिकपुरी

 गज़ल- ज्ञानुदास मानिकपुरी 


बहरे हजज़ मुसद्दस सालिम

मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन 

1222 1222 1222


कठिन अड़बड़ हे जिनगी के डगर भाई

इही तँय सोचके झन आज डर भाई


मया ममता सुवारथ मोह लालच के 

लगे फाँदा हवय चारो डहर भाई


समझ सिधवा कहूँ झन रौंद दय कोनो

बचे बर हे ता गोल्लर कस डँकर भाई


जिहाँ जाना हवय तोला हे बड़ दुरिहाँँ 

अभी ले हार थक के झन फुँसर भाई


बहुत किस्मत ले घर परिवार मिलथे 'ज्ञानु'

तै नानुक बात मा झन छोड़ घर भाई


ज्ञानु

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