Total Pageviews

Saturday, 2 January 2021

गजल--चोवा राम 'बादल'*

 *गजल--चोवा राम 'बादल'*


*बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम*


*मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन*


*1222 1222 1222*


अजी कुछ सोच अब झन कहिबे शनिया के

चढ़ै  झन खेत ककरो नाम बनिया के


कभू जाने नहीं का हाल हे हमरो

तियासी बासी खा लेथन धो पनिया के


कहाँ ले जाही वो अब स्कूल महिना भर

चिरागे ड्रेस नइये मुन्नी रनिया के


लड़त हाबयँ बिलइया  रोटी बाँटे बर

मजा तिसरा उड़ाही खाही चनिया के


खवासी लागथे अबड़ेच चटनी हा

पिसाये हे टमाटर मिरचा धनिया के


करोना जाँच करवा हे धरे सर्दी

कहाँ बोचक तैं जाबे  ओती कनिया के


लबारी मारथे जे हा समझ 'बादल'

उही करथे बनाके गोठ तनिया के


चोवा राम 'बादल'

हथबंद, छत्तीसगढ़

No comments:

Post a Comment

गजल

 गजल 2122 2122 2122 पूस के आसाढ़ सँग गठजोड़ होगे। दुःख के अउ उपरहा दू गोड़ होगे। वोट देके कोन ला जनता जितावैं। झूठ बोले के इहाँ बस होड़ होगे। खा...