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Saturday, 2 January 2021

ग़ज़ल --आशा देशमुख*🌹

 🌹 *ग़ज़ल --आशा देशमुख*🌹


*बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम*


*मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन*


*1222 1222 1222*



समे के धार हा सब ला बहा देथे

बली हे काल बड़ जग ला दबा देथे।


अबड़ इतरात हावस तँय दिखावा मा

तरीका बात मनखे के बता देथे।


सवारी झन करव नौसिखिया के सँग मा

कहूँ कर आय दिन गाड़ी झपा देथे।


चलाकी ला भरे बाजार मा देखव

फ़टे हे नोट ला चतुरा चला देथे।


अतिक समझाय हँव बइहा सुधर जा रे

मितानी साँप सँग झन कर दगा देथे।


कुलर पंखा घलो बिजली बिना बिरथा

लगे जे पेड़ अँगना मा हवा देथे।


भले कानून ले बच के निकल जाबे

करम के देवता खच्चित सजा देथे



आशा देशमुख

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