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Saturday, 2 January 2021

छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल-सुखदेव

 छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल-सुखदेव

बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम

मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन


1222 1222 1222


गजरना सारथक होही बरसही ता

दया अउ दान दानी के दरसही ता


अभी सरसन न दी हे बचपना के दिन

गड़ाबो ढेखरा नारा लरसही ता


बनउटी छाप तो तॅंय झन बड़ाई कर

बड़ाई हो जही रइयत हरसही ता


मनुज बिरथा कलेवा दसकरन के हे

जिते-जीयत ददा दाई तरसही ता


सफल सुखदेव ए जोनी जनम जिनगी

सुमत सद्भाव समता मा सरसही ता


-सुखदेव सिंह''अहिलेश्वर''

गोरखपुर कबीरधाम छत्तीसगढ़

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