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Thursday, 7 January 2021

ग़ज़ल -आशा देशमुख* 🌹

 🌹 *ग़ज़ल -आशा देशमुख* 🌹


*बहरे रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़*


*फ़ाइलातुन फ़यलातुन फ़यलातुन फ़ेलुन*


*2122 1122 1122 22*



आजकल न्याय हा बीमार परे हे गउकिन

अंधवा बैद हा उपचार करे हे गउकिन।


वो सुरुज ला कभू ढाँकथे बदली करके

का कहंव  जोगनी कंडील धरे हे गउ किन।


देख नॉगर बिना होगे हवे बंजर खेती

कोढ़िया के बड़े मुँह फूल झरे हे गउकिन।


कोलिहा मन के हुआँ थर्राय हावय जंगल

शेर हा माँद मा चुप बैठ डरे हे गउकिन।


खल खलल बाजथे अधजलिया घड़ा के पानी

मौन हा  भीतरी सागर ला भरे हे गउकिन।


खेत बारी के दिखेे  चित्र हा हरियर हरियर

सौंहते  देख गियाँ भैंस चरे हे गउकिन।


आज कलयुग के नियम देख तो  उल्टा आशा

खात ही मोंगरी डूमर ला मरे हे गउकिन।।



आशा देशमुख

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