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Thursday, 7 January 2021

गज़ल- ज्ञानुदास मानिकपुरी

 गज़ल- ज्ञानुदास मानिकपुरी 


बहरे रमल मुसम्मन मखबून महजूफ़

फ़ाइलातुन फ़यलातुन फ़यलातुन फेलुन

2122 1122 1122 22


आलसी छोड़ तभे बात इहाँ बनही रे

खुद ला झंझोड़ तभे बात इहाँ बनही रे


दिन ब दिन ताल तलैया हा सुखावत हावय

तँय कुआँ कोड़ तभे बात इहाँ बनही रे


बनके अब सिधवा इहाँ रहना नइ बइरी के 

मूड़ ला फोड़ तभे बात इहाँ बनही रे


छोड़ दू चार कहाँ काम के होथे साथी

झन लगा होड़ तभे बात इहाँ बनही रे


नइ मिलत सोच के झन छोड़ डगर मंजिल के 

'ज्ञानु' पग मोड़ तभे बात इहाँ बनही रे


ज्ञानु

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