गजल- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
*बहरे मज़ारिअ मुसमन अख़रब मकफूफ़ मकफूफ़ महज़ूफ़*
मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईलु फ़ाइलुन
*221 2121 1221 212*
चमचागिरी करे उही मनखे के नाम हे।
सच के कहाँ हे मोल सदा झूठ दाम हे।।
माथा तिलक लगा बने पंडित बड़े बड़े।
दिखथे उही धरम के बड़का गुलाम हे।।
कपटी कपट करे सदा कुछ पाय मान बर।
रखथे छुरी बगल मा भले मुँह मा राम हे।।
भटके कहाँ इँहा उँहा प्रभु खोज मा बता।
घट भीतरी ला झाँक बसे चारो धाम हे।।
बिछड़े पिरित मिले कहूँ बड़का नसीब ले।
छलके मया मयारू खुशी प्रेम जाम हे।
सुन ले किसान के कभू तैं तो पुकार ला।
गर मा अकाल फँदा सहे जाड़ घाम हे।।
बनके सबो के मीत गजानंद जीत मन।
जग बैर पालना इँहा दुश्मन के काम हे।।
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ )
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Tuesday, 8 September 2020
गजल- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
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गजल
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🌹 ग़ज़ल -आशा देशमुख 🌹 *बहरे रमल मुसम्मन मशकूल सालिम मज़ाइफ़ [दोगुन]* *फ़यलात फ़ाइलातुन फ़यलात फ़ाइलातुन* *1121 2122 1121 2122* वो लगाय नेकी...
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