गजल- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बहरे कामिल मुसम्मन सालिम
मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन
11212 11212 11212 11212
धरे बात सत्य बढ़े चलव, तभे मोल जिनगी के मान ले।
बढ़ा पाँव ला रखे हौसला, मिले जीत तब तो सदा ठान ले।।
जले हे जमाना मया देख के, करे कोंन कब हे कदर भला।
मिटा ना सके कभू तो मया, जगे मन हिलोर उफान ले।।
बनौ देश वीर सिपाही तुम, सदा नाम मान अमर रही।
लुटा जान रक्षा वतन करौ, जियौ शान से मरौ शान ले।।
धरे रूढ़िवादी परंपरा, बढ़े जात लोग समाज हा।
मिटे अन्धभक्ति सबो ढोंग जग, बढ़ा पाँव आज धियान ले।।
कहे सत्यबोध उठौ अउ बढ़ौ, करौ काम देश समाज हित।
मिला हाँ मा हाँ चलौ झन कभू, सही का गलत बने जान ले।
गजलकार- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ )
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Wednesday, 2 September 2020
गजल- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
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गजल
गजल 2122 2122 2122 पूस के आसाढ़ सँग गठजोड़ होगे। दुःख के अउ उपरहा दू गोड़ होगे। वोट देके कोन ला जनता जितावैं। झूठ बोले के इहाँ बस होड़ होगे। खा...
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गजल बहरे हज़ज मुसम्मन अख़रब मक़्फूफ़ मक़्फूफ़ मुख़न्नक सालिम मफ़ऊल मुफ़ाईलुन मफ़ऊल मुफ़ाईलुन 221 1222 221 1222 रेंगत हे गलत रस्ता इंस...
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🌹 ग़ज़ल -आशा देशमुख 🌹 *बहरे रमल मुसम्मन मशकूल सालिम मज़ाइफ़ [दोगुन]* *फ़यलात फ़ाइलातुन फ़यलात फ़ाइलातुन* *1121 2122 1121 2122* वो लगाय नेकी...
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